Sad Story in Hindi – सुहानी का रूहानी सफ़र By Suhani Meena

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5 Responses

  1. arjun meena says:

    suprb (y) 🙂

  2. Hansraj Meena says:

    बहुत हास्यप्रद दुखद: काल्पनिक कहानी !

  3. sanjay says:

    jo vyakti wakt k saath khud ko nhi badal pata or apne bhavishya k liye kade faisle ye soch k nhi leta ki shayad aage chal kr theek ho jayega uska yahi hashra hota hai, uski zindagi ek laash bn jaati hai. Aaj k dor main wakt k saath chalna bahut jaruri hota hai, or logon ka kya hai bahut jaldi bhul jaate hn aaj tum uchaiyon pr bethe ho to log salam karenge or nhi to bhi log rukenge nhi, wakt kiske pass hai yahan har adami akela hai, ye samaj, ye rishte sb wakt or jarurat k hisab se hain nhi to koi kisi ka nhi yahan.

  4. Dinesh parmar says:

    यह समाज हमेशा से पुरुष प्रधान था और आज भी है,
    हर बार सिता को ही अग्नि परीक्षा देनी पड़ी है, हर बार द्रौपदी का चीर हरन होता आया है, जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तो दोस कीसे दीया जाए
    यहां जरूरत है अपनी विचारधारा को बदलने की,
    पती और पत्नी दोनों की बराबर जिम्मेदारी होती है संसार चलाने की उसमें से यदी कोई एक भी राह भटकता है तो घर टूट जायेगा और उसका खामियाजा संतानों को भुगतना पड़ेगा माँ या बाप के प्यार के बीना रहे कर, सब से गुजारिश है की कम से कम अपने संतान के भविष्य की खातिर ही सही पर एैसी गलतियां न करें..
    आप की स्टारी वास्तविक है सुहानी जी क्रिष्ना जी आपको हिम्मत दे सारे दुखों से उबरने की
    जय श्री राधे राधे

  5. yogendra meena says:

    आप की कहानी में वास्तविकता है पर आज के समय में लड़की भी लड़कों की जिंदगी बर्बाद करते थे

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